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mahabharat 8.61.22: हे भारत! रणभूमि में तीन बाणों से उस शक्ति को काटकर कर्ण ने नौ तीखे बाणों से शिखण्डी को भी घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.61.22 
तां छित्त्वा समरे कर्णस्त्रिभिर्भारत सायकै:।
शिखण्डिनमथाविध्यन्नवभिर्निशितै: शरै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! रणभूमि में तीन बाणों से उस शक्ति को काटकर कर्ण ने नौ तीखे बाणों से शिखण्डी को भी घायल कर दिया।
 
Bhaarat! Having cut off that power with three arrows in the battlefield, Karna also wounded Shikhandi with nine sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)