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mahabharat 8.61.21: उस अश्वरहित रथ से कूदकर क्रोधित महायोद्धा शिखंडी ने कर्ण पर अपनी शक्ति का प्रयोग किया।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.61.21 
हताश्वात्तु ततो यानादवप्लुत्य महारथ:।
शक्तं चिक्षेप कर्णाय संक्रुद्ध: शत्रुतापन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस अश्वरहित रथ से कूदकर क्रोधित महायोद्धा शिखंडी ने कर्ण पर अपनी शक्ति का प्रयोग किया।
 
Jumping from that horseless chariot, the enraged great warrior Shikhandi used his Shakti on Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)