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mahabharat 8.61.19: महान धनुर्धर शिखंडी, जो युद्धभूमि में सारथी के पुत्र द्वारा बुरी तरह घायल कर दिया गया था, उसने भी युद्धभूमि में नब्बे तीखे बाणों से कर्ण को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.61.19 
सोऽतिविद्धो महेष्वास: सूतपुत्रेण संयुगे।
कर्णं विव्याध समरे नवत्या निशितै: शरै:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महान धनुर्धर शिखंडी, जो युद्धभूमि में सारथी के पुत्र द्वारा बुरी तरह घायल कर दिया गया था, उसने भी युद्धभूमि में नब्बे तीखे बाणों से कर्ण को घायल कर दिया।
 
The great archer Shikhandi, who had been severely wounded by the son of a charioteer on the battlefield, also wounded Karna on the battlefield with ninety sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)