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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन
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श्लोक 18
श्लोक
8.61.18
धारयंस्तु स तान् बाणान् शिखण्डी बह्वशोभत।
राजत: पर्वतो यद्वत् त्रिभि: शृङ्गैरिवोत्थितै:॥ १८॥
अनुवाद
उन बाणों को माथे पर धारण किए हुए शिखण्डी तीन उभरी हुई चोटियों वाले चाँदी के पर्वत के समान शोभा पा रहा था ॥18॥
Wearing those arrows on his forehead, Shikhandi looked like a silvery mountain with three raised peaks. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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