श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  8.61.1-2 
धृतराष्ट्र उवाच
निवृत्ते भीमसेने च पाण्डवे च युधिष्ठिरे।
वध्यमाने बले चापि मामके पाण्डुसृञ्जयै:॥ १॥
द्रवमाणे बलौघे च निरानन्दे मुहुर्मुहु:।
किमकुर्वन्त कुरवस्तन्ममाचक्ष्व संजय॥ २॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जब भीमसेन और पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर लौटकर आये, तब पाण्डव और संजय मेरी सेना का संहार करने लगे और मेरी सेना हर्षविह्वल होकर बार-बार भागने लगी, उस समय कौरवों ने क्या किया? यह बताओ।
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! When Bhimasena and Pandu's son Yudhishthira returned, Pandavas and Sanjaya started killing my army and my army became joyless and started running again and again, what did the Kauravas do at that time? Tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)