श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 90-91
 
 
श्लोक  8.60.90-91 
ते वध्यमाना: समरे संशप्तकगणा: प्रभो॥ ९०॥
प्रभग्ना: समरे भीता दिशो दश महाबला:।
शक्रस्यातिथितां गत्वा विशोका ह्यभवंस्तदा॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! युद्धस्थल में महाबली संशप्तकों को मारा गया देखकर वे निराश और भयभीत होकर सब ओर भाग गए। और बहुत से वीर पुरुष इन्द्र के अतिथि बनकर तुरन्त ही शोक से मुक्त हो गए।
 
Lord! Seeing the mighty Samshaptakas being killed in the battle-field, disheartened and frightened, they fled in all directions. And many brave men became guests of Indra and instantly got rid of their grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)