श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 80-81h
 
 
श्लोक  8.60.80-81h 
एष नैषादिरभ्येति द्विपमुख्येन पाण्डवम्॥ ८०॥
जिघांसुस्तोमरै: क्रुद्धो दण्डपाणिरिवान्तक:।
 
 
अनुवाद
यह निषादपुत्र महान गजराज पर आरूढ़ होकर क्रोधी दण्डपाणि यमराज के समान तोमरों द्वारा भीमसेन को मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण कर रहा है ॥80 1/2॥
 
This son of Nishad, mounted on the great Gajraj, is attacking him like the wrathful Dandapani Yamraj, desirous of killing Bhimasena through the Tomaras. 80 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)