श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  8.60.70-71h 
शस्त्रमाच्छिद्य शत्रूणां सायुधानां निरायुधा:॥ ७०॥
तेनैवैतानमोघास्त्रा निघ्नन्ति च नदन्ति च।
 
 
अनुवाद
‘वे स्वयं निहत्थे होने पर भी अपने शस्त्रधारी शत्रुओं के शस्त्र छीनकर उन्हीं से उनका वध कर देते हैं और गर्जना करते हैं; उनके शस्त्र कभी भी अपने लक्ष्य से चूकते नहीं हैं।॥70 1/2॥
 
‘Even though they themselves are unarmed, they snatch the weapons of their armed enemies and kill them with the same and roar; their weapons never miss their target.॥ 70 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)