श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  8.60.65-66h 
रथेभ्य: प्रपतन्त्येते रथिनो विगतासव:॥ ६५॥
नानावर्णैर्हता बाणै: पञ्चालैरपलायिभि:।
 
 
अनुवाद
ये प्राणहीन सारथि युद्ध में पीठ न दिखाने वाले पांचाल योद्धाओं के नाना प्रकार के रंग वाले बाणों से घायल होकर अपने रथों से नीचे गिर रहे हैं॥65 1/2॥
 
‘These lifeless charioteers are falling down from their chariots after being struck by arrows of various colours of the Panchala warriors who do not turn their backs in the battle.॥ 65 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)