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mahabharat 8.60.50: भरतभूषण कुन्तीकुमार! अब तुम अपने को पुण्यात्मा और राधापुत्र कर्ण को धर्मात्मा युधिष्ठिर का अपराधी समझकर समयानुसार अपना कर्तव्य करो॥50॥   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  8.60.50 
आत्मानं च कृतात्मानं समीक्ष्य भरतर्षभ।
कृतागसं च राधेयं धर्मात्मनि युधिष्ठिरे।
प्रतिपद्यस्व कौन्तेय प्राप्तकालमनन्तरम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
भरतभूषण कुन्तीकुमार! अब तुम अपने को पुण्यात्मा और राधापुत्र कर्ण को धर्मात्मा युधिष्ठिर का अपराधी समझकर समयानुसार अपना कर्तव्य करो॥50॥
 
Bharatbhushan Kuntikumar! Now consider yourself as a virtuous soul and Radha's son Karna as the culprit of the virtuous Yudhishthir and now perform your duty as per the time. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)