आत्मानं च कृतात्मानं समीक्ष्य भरतर्षभ।
कृतागसं च राधेयं धर्मात्मनि युधिष्ठिरे।
प्रतिपद्यस्व कौन्तेय प्राप्तकालमनन्तरम्॥ ५०॥
अनुवाद
भरतभूषण कुन्तीकुमार! अब तुम अपने को पुण्यात्मा और राधापुत्र कर्ण को धर्मात्मा युधिष्ठिर का अपराधी समझकर समयानुसार अपना कर्तव्य करो॥50॥
Bharatbhushan Kuntikumar! Now consider yourself as a virtuous soul and Radha's son Karna as the culprit of the virtuous Yudhishthir and now perform your duty as per the time. 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥