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mahabharat 8.60.35: हे अर्जुन! देखो, जैसे देवताओं के बीच में शत्रुओं को परास्त करके देवताओं के राजा इन्द्र शोभा पाते हैं, वैसे ही यह कर्ण भी कौरवों के बीच में अपना उत्तम धनुष खींचता हुआ शोभा पाता है॥35॥   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.60.35 
पश्य पार्थ धनु: श्रेष्ठं विकर्षन् साधु शोभते।
शत्रुं जित्वा यथा शक्रो देवसंघै: समावृत:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! देखो, जैसे देवताओं के बीच में शत्रुओं को परास्त करके देवताओं के राजा इन्द्र शोभा पाते हैं, वैसे ही यह कर्ण भी कौरवों के बीच में अपना उत्तम धनुष खींचता हुआ शोभा पाता है॥35॥
 
Arjuna! Look, just as the King of the Gods Indra looks beautiful surrounded by the gods after defeating the enemy, similarly this Karna looks beautiful among the Kauravas pulling his excellent bow -॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)