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mahabharat 8.60.31: हे ध्वजाधारी रथियों में श्रेष्ठ अर्जुन! देखो, सारथीपुत्र के रथ पर कैसी ध्वजा लहरा रही है। हाथी की रस्सी के समान चिह्न वाली उसकी ध्वजा युद्धभूमि में कैसे इधर-उधर घूम रही है।   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.60.31 
हस्तिकक्ष्यां रणे पश्य चरन्तीं तत्र तत्र ह।
रथस्थं सूतपुत्रस्य केतुुं केतुमतां वर॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे ध्वजाधारी रथियों में श्रेष्ठ अर्जुन! देखो, सारथीपुत्र के रथ पर कैसी ध्वजा लहरा रही है। हाथी की रस्सी के समान चिह्न वाली उसकी ध्वजा युद्धभूमि में कैसे इधर-उधर घूम रही है।
 
O Arjuna, the best of all flag-bearing charioteers! See what a flag is fluttering on the chariot of the son of a charioteer. How his banner bearing the mark of an elephant's rope is wandering here and there on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)