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mahabharat 8.60.27: हे कुन्तीपुत्र! जैसे हाथी कमलों से भरे हुए तालाब को मथता है, उसी प्रकार यह कर्ण युद्धभूमि में अपने बाणों से पाण्डव सेना का विनाश कर रहा है।   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.60.27 
एष कर्णो रणे पार्थ पाण्डवानामनीकिनीम्।
शरैर्विध्वंसयति वै नलिनीमिव कुञ्जर:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! जैसे हाथी कमलों से भरे हुए तालाब को मथता है, उसी प्रकार यह कर्ण युद्धभूमि में अपने बाणों से पाण्डव सेना का विनाश कर रहा है।
 
O son of Kunti! Just as an elephant churns a pond full of lotuses, similarly this Karna is destroying the Pandava army with his arrows on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)