न केतुर्दृश्यते राज्ञ: कर्णेन निहत: शरै:।
पश्यतोर्यमयो: पार्थ सात्यकेश्च शिखण्डिन:॥ २५॥
धृष्टद्युम्नस्य भीमस्य शतानीकस्य वा विभो।
पञ्चालानां च सर्वेषां चेदीनां चैव भारत॥ २६॥
अनुवाद
पार्थ! राजा का ध्वज दिखाई नहीं दे रहा है। कर्ण ने उसे अपने बाणों से काट डाला है। हे भरतपुत्र! हे प्रभु! उसने नकुल-सहदेव, सात्यकि, शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, शतानीक, समस्त पांचाल सैनिकों और चेदि देश के योद्धाओं के सामने ऐसा किया है।॥ 25-26॥
‘Partha! The king's flag is not visible. Karna has cut it with his arrows. O son of Bharata! O Lord! He has done this in front of Nakul-Sahadeva, Satyaki, Shikhandi, Dhrishtadyumna, Bhimasena, Satanika, all the Panchala soldiers and the warriors of Chedi country.॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥