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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय
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श्लोक 67
श्लोक
8.59.67
तत: प्रयातो दाशार्ह: श्रुत्वा पाण्डवभाषितम्।
रथेनातिपताकेन मनोमारुतरंहसा॥ ६७॥
अनुवाद
अर्जुन के वचन सुनकर श्रीकृष्ण मन और वायु के समान वेगवान तथा अत्यन्त ऊँची ध्वजा वाले रथ पर सवार होकर वहाँ से चले गए॥67॥
After hearing Arjun's words, Sri Krishna departed from there in a chariot that was as swift as the mind and the wind and had a very high flag. ॥ 67॥
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि द्रौण्यपयाने एकोनषष्टितमोऽध्याय:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें अश्वत्थामाका पलायनविषयक उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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