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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  8.59.66 
एवं कृत्वाब्रवीत् पार्थो वासुदेवं धनंजय:।
याहि संशप्तकान् कृष्ण कार्यमेतत् परं मम॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा पराक्रम करने के बाद कुन्तीपुत्र धनंजय ने भगवान कृष्ण से कहा - 'श्रीकृष्ण! अब संशप्तकों की ओर बढ़िए। इस समय यही मेरा सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।'
 
After performing such a feat, Kunti's son Dhananjaya said to Lord Krishna - 'Shri Krishna! Now proceed towards the Samshaptakas. This is my most important task at this time.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)