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एवं कृत्वाब्रवीत् पार्थो वासुदेवं धनंजय:।
याहि संशप्तकान् कृष्ण कार्यमेतत् परं मम॥ ६६॥
अनुवाद
ऐसा पराक्रम करने के बाद कुन्तीपुत्र धनंजय ने भगवान कृष्ण से कहा - 'श्रीकृष्ण! अब संशप्तकों की ओर बढ़िए। इस समय यही मेरा सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।'
After performing such a feat, Kunti's son Dhananjaya said to Lord Krishna - 'Shri Krishna! Now proceed towards the Samshaptakas. This is my most important task at this time.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥