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mahabharat 8.59.64: महाराज! धृष्टद्युम्न को संकट से मुक्त और द्रोणपुत्र को दुःखी देखकर पांचालों ने विजय से प्रसन्न होकर बड़े जोर से गर्जना की।   |   mahabharat अध्याय 8.59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  8.59.64 
अथोत्क्रुष्टं महाराज पञ्चालैर्जितकाशिभि:।
मोक्षितं पार्षतं दृष्ट्वा द्रोणपुत्रं च पीडितम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! धृष्टद्युम्न को संकट से मुक्त और द्रोणपुत्र को दुःखी देखकर पांचालों ने विजय से प्रसन्न होकर बड़े जोर से गर्जना की।
 
Maharaj! Seeing Dhrishtadyumna freed from trouble and Drona's son suffering, the Panchalas, rejoicing in victory, roared loudly. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)