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mahabharat 8.59.63: द्रोणपुत्र को व्याकुल देखकर उनका सारथी शीघ्रता से उसे अपने रथ पर बैठाकर युद्धभूमि से दूर ले गया।   |   mahabharat अध्याय 8.59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  8.59.63 
विह्वलं तं तु वीक्ष्याथ द्रोणपुत्रं च सारथि:।
अपोवाह रथेनाजौ त्वरमाणो रणाजिरात्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
द्रोणपुत्र को व्याकुल देखकर उनका सारथी शीघ्रता से उसे अपने रथ पर बैठाकर युद्धभूमि से दूर ले गया।
 
Seeing Drona's son in a state of agitation, his charioteer hurriedly took him away from the battle-field in his chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)