नरेश्वर! उधर वीर सहदेव शत्रुओं को संताप देनेवाले धृष्टद्युम्न को अपने रथ पर बिठाकर रणभूमि में अन्यत्र ले गए॥57॥
Nareshwar! Meanwhile, the brave Sahadev took away Dhrishtadyumna, who was tormenting the enemies, somewhere else in the battlefield in his chariot. 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥