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mahabharat 8.59.50: महाराज! ऐसा कहकर तेजस्वी वासुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने अपने घोड़े उधर दौड़ाये, जिधर द्रोणकुमार अश्वत्थामा खड़े थे। 50॥   |   mahabharat अध्याय 8.59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  8.59.50 
एवमुक्त्वा महाराज वासुदेव: प्रतापवान्।
प्रैषयत् तुरगांस्तत्र यत्र द्रौणिर्व्यवस्थित:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ऐसा कहकर तेजस्वी वासुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने अपने घोड़े उधर दौड़ाये, जिधर द्रोणकुमार अश्वत्थामा खड़े थे। 50॥
 
Maharaj! Saying this, the glorious Vasudevanandan Shri Krishna drove his horses towards where Dronakumar Ashwatthama was standing. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)