श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 47-48
 
 
श्लोक  8.59.47-48 
एतस्मिन्नेव काले तु माधवोऽर्जुनमब्रवीत्॥ ४७॥
पश्य पार्थ यथा द्रौणि: पार्षतस्य वधं प्रति।
यत्नं करोति विपुलं हन्याच्चैनं न संशय:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
इस समय श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा - 'पार्थ! देखो, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा धृष्टद्युम्न को मारने के लिए कितना बड़ा प्रयत्न कर रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह उसे मार सकता है।' 47-48
 
At this time Shri Krishna said to Arjuna - 'Partha! Look, what a great effort Drona's son Ashwatthama is making to kill Dhrishtadyumna. There is no doubt that he can kill him. 47-48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)