एवमुक्त: प्रत्युवाच धृष्टद्युम्न: प्रतापवान्।
प्रतिवाक्यं स एवासिर्मामको दास्यते तव॥ ३१॥
येनैव ते पितुर्दत्तं यतमानस्य संयुगे।
अनुवाद
अश्वत्थामा के ऐसा कहने पर महाबली धृष्टद्युम्न ने उसे इस प्रकार उत्तर दिया - 'हे! तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर मेरी उसी तलवार से मिलेगा, जो मैंने युद्धभूमि में विजय के लिए प्रयत्नशील तुम्हारे पिता को दी थी।'
When Ashvatthama said this, the mighty Dhrishtadyumna replied to him thus - 'Oh! The answer to this question of yours will be given by my same sword, which I had given to your father, who was striving for victory in the battlefield. 31 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥