श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.59.25 
स ज्ञात्वा समरेऽऽत्मानं शस्त्रेणावध्यमेव तु।
जवेनाभ्याययौ द्रौणिं काल: कालमिव क्षये॥ २५॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में अपने को अस्त्र-शस्त्रों से अजेय समझकर वह बड़े वेग से अश्वत्थामा की ओर आया, मानो प्रलय के समय स्वयं काल ने ही काल पर आक्रमण कर दिया हो ॥25॥
 
Considering himself invulnerable to weapons on the battlefield, he came towards Ashwatthama with great speed, as if at the time of doomsday, time itself had attacked time. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)