अभ्यभाषत संक्रुद्धो द्रौणि: परपुरंजय:।
तिष्ठ तिष्ठाद्य ब्रह्मघ्न न मे जीवन् विमोक्ष्यसे॥ २१॥
अनुवाद
शत्रु की राजधानी में पहुँचकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा अत्यन्त क्रोधित होकर बोला, "ब्राह्मण की हत्या करने वाले पापी! खड़ा रह, खड़ा रह, आज तू मेरे हाथों से जीवित बचकर नहीं निकल सकेगा।"
On reaching the enemy capital, Drona's son Ashwatthama became very angry and said, "You sinner who has killed a brahmin! Stand still, stand still, today you will not be able to escape from my hands alive."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥