श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.59.18 
ततो युद्धं महाराज चक्षु:श्रोत्रभयानकम्।
आसीद् घोरं च चित्रं च प्रेक्षणीयं समन्तत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तब बड़ा भयंकर और विचित्र युद्ध छिड़ गया, जो आँखों से देखने और कानों से सुनने में भी भयानक था और सब ओर से देखने योग्य था॥18॥
 
Maharaj! Then a fierce and strange war broke out, which was fearful even to see with the eyes and hear with the ears and was worth watching from all sides. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)