श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.59.15 
तमापतन्तं सहसा घोररूपं विशाम्पते।
चिच्छेद शतधा राजञ्शैनेय: कृतहस्तवत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! राजा! सहसा ही सात्यकि उस भयंकर बाण को लेकर आये और कुशल योद्धा के समान उन्होंने उसके सौ टुकड़े कर दिये।
 
Prajanath! King! Suddenly Satyaki came with that terrible arrow and like a skilled warrior, he broke him into a hundred pieces. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)