श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.59.14 
तस्य कर्णो महाराज शरं कनकभूषणम्।
प्रेषयामास संक्रुद्धो मृत्युदण्डमिवापरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तब कर्ण ने अत्यन्त क्रोधित होकर धृष्टद्युम्न को दूसरा मृत्युदण्ड देने के लिए उस पर स्वर्ण-मंडित बाण चलाया॥14॥
 
Maharaj! Then Karna became very angry and fired a gold-clad arrow at Dhrishtadyumna as a second death sentence. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)