श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 59: धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाका धृष्टद्युम्नपर आक्रमण तथा अर्जुनके द्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा और अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.59.10 
ते वर्म हेमविकृतं भित्त्वा तस्य महात्मन:।
शोणिताक्ता व्यराजन्त शक्रगोपा इवानघ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! वे बाण महामनस्वी धृष्टद्युम्न के स्वर्णमय कवच को छेदकर उसके रक्त से सने हुए हो गए और इन्द्रगोप (वीरबाहुति) नामक कीड़ों के समान शोभायमान होने लगे॥10॥
 
O sinless king! Those arrows pierced the golden armour of the great-minded Dhrishtadyumna and became stained with his blood and began to look as beautiful as the insects called Indragop (Veerbahuti).॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)