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mahabharat 8.58.6-7h: अतः मेरी प्रसन्नता के लिए आप उस स्थान पर पधारें जहाँ राजा युधिष्ठिर हैं। हे वार्ष्णेय! युद्ध में अपने पुत्र युधिष्ठिर और उसके भाइयों को सकुशल देखकर मैं पुनः रणभूमि में शत्रुओं से युद्ध करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 8.58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  8.58.6-7h 
तस्मात् त्वं मत्प्रियं कुर्वन् याहि यत्र युधिष्ठिर:।
दृष्ट्वा कुशलिनं युद्धे धर्मपुत्रं सहानुजम्॥ ६॥
पुनर्योद्धास्मि वार्ष्णेय शत्रुभि: सह संयुगे।
 
 
अनुवाद
अतः मेरी प्रसन्नता के लिए आप उस स्थान पर पधारें जहाँ राजा युधिष्ठिर हैं। हे वार्ष्णेय! युद्ध में अपने पुत्र युधिष्ठिर और उसके भाइयों को सकुशल देखकर मैं पुनः रणभूमि में शत्रुओं से युद्ध करूँगा।
 
‘Therefore, to please me, please come to the place where King Yudhishthira is. O Varshneya! After seeing my son Yudhishthira and his brothers safe in the war, I will once again fight with the enemies in the battlefield.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)