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mahabharat 8.58.52: पृथ्वीनाथ! इस प्रकार इस पृथ्वी पर आपकी तथा शत्रुओं की सेनाओं का महान् विनाश हो गया है। हे राजन! यह सब आपकी कुमति का ही परिणाम है।   |   mahabharat अध्याय 8.58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  8.58.52 
एवमेष क्षयो वृत्त: पृथिव्यां पृथिवीपते।
तावकानां परेषां च राजन् दुर्मन्त्रिते तव॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! इस प्रकार इस पृथ्वी पर आपकी तथा शत्रुओं की सेनाओं का महान् विनाश हो गया है। हे राजन! यह सब आपकी कुमति का ही परिणाम है।
 
Prithvinath! In this way, a great destruction of your and the enemy's armies has taken place on this earth. O King! All this is the result of your bad advice. 52.
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि वासुदेववाक्ये अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें भगवान् श्रीकृष्णका वाक्यविषयक अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)