श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  8.58.48 
अन्तकप्रतिमो वेगे शक्रतुल्यपराक्रम:।
असौ गच्छति कौरव्य द्रौणि: शस्त्रभृतां वर:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, जो तेज में यमराज के समान तथा पराक्रम में इन्द्र के समान है, वह अश्वत्थामा वहाँ जा रहा है॥48॥
 
Kurunandan! Ashwatthama, the best among weapon-wielders, who is equal to Yamraj in speed and Indra in bravery, is going there. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)