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mahabharat 8.58.32: राजाओं के रत्नजटित मुकुट, विचित्र स्वर्ण हार, छत्र, पंखे और थालियाँ फेंके पड़े हैं॥32॥   |   mahabharat अध्याय 8.58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.58.32 
चूडामणीन् नरेन्द्राणां विचित्रा: काञ्चनस्रज:।
छत्राणि चापविद्धानि चामरव्यजनानि च॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजाओं के रत्नजटित मुकुट, विचित्र स्वर्ण हार, छत्र, पंखे और थालियाँ फेंके पड़े हैं॥32॥
 
‘The jeweled crowns of the kings, the strange golden necklaces, the umbrellas, fans and dishes are lying thrown away.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)