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mahabharat 8.58.31: घोड़ों की पीठ पर बिछाने के लिए हिरण की खाल से बने, विचित्र रत्नों से जड़े और सोने के धागों से सजे कई झूले जमीन पर पड़े हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.58.31 
विचित्रमणिचित्रांश्च जातरूपपरिष्कृतान्।
अश्वास्तरपरिस्तोमान् राङ्कवान् पतितान् भुवि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
घोड़ों की पीठ पर बिछाने के लिए हिरण की खाल से बने, विचित्र रत्नों से जड़े और सोने के धागों से सजे कई झूले जमीन पर पड़े हैं।
 
Many swings made of deer skin, studded with strange gems and adorned with gold threads, are lying on the ground, for being spread on the backs of horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)