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mahabharat 8.58.30: बहुत से सुन्दर लाजवन्त बाण भूमि पर पड़े हैं। सवारों के हाथों में जो सुनहरे चाबुक थे, वे गिर पड़े हैं॥30॥   |   mahabharat अध्याय 8.58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.58.30 
वैदूर्यदण्डांश्च शुभान् पतितानङ्कुशान् भुवि।
बद्धा: सादिभुजाग्रेषु सुवर्णविकृता: कशा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
बहुत से सुन्दर लाजवन्त बाण भूमि पर पड़े हैं। सवारों के हाथों में जो सुनहरे चाबुक थे, वे गिर पड़े हैं॥30॥
 
Many beautiful goads with shafts made of lapis lazuli are lying on the ground. Many golden whips that were in the hands of the riders have fallen down.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)