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mahabharat 8.58.16: लोहे के भाले, भारी मूसल, विचित्र कुल्हाड़ियाँ और विशाल परिघ यहाँ-वहाँ पड़े हुए हैं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 8.58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.58.16 
अय:कुन्तांश्च पतितान् मुसलानि गुरूणि च।
शतघ्नी: पश्य चित्राश्च विपुलान् परिघांस्तथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
लोहे के भाले, भारी मूसल, विचित्र कुल्हाड़ियाँ और विशाल परिघ यहाँ-वहाँ पड़े हुए हैं॥16॥
 
‘Iron spears, heavy pestles, strange axes and huge parighas are lying here and there.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)