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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका श्रीकृष्णसे युधिष्ठिरके पास चलनेका आग्रह तथा श्रीकृष्णका उन्हें युद्धभूमि दिखाते और वहाँका समाचार बताते हुए रथको आगे बढ़ाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.58.11 
पश्य भारत चापानि रुक्मपृष्ठानि धन्विनाम्।
मृतानामपविद्धानि कलापांश्च महाधनान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे भारतपुत्र! देखो, ये मृत धनुर्धरों के सोने के बने हुए धनुष और बहुमूल्य तरकश फेंके हुए पड़े हैं।
 
O son of Bharat! Look, these gold-backed bows and precious quivers of the dead archers are lying thrown away. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)