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mahabharat 8.57.9: जब तक मैं धृष्टद्युम्न को न मार डालूँ, तब तक मैं अपना कवच नहीं उतारूँगा।’ यदि मेरी यह प्रतिज्ञा झूठी सिद्ध हुई, तो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति न हो॥9॥   |   mahabharat अध्याय 8.57: दुर्योधनका सैनिकोंको प्रोत्साहन देना और अश्वत्थामाकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 57: दुर्योधनका सैनिकोंको प्रोत्साहन देना और अश्वत्थामाकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.57.9 
धृष्टद्युम्नमहत्वाहं न विमोक्ष्यामि दंशनम्।
अनृतायां प्रतिज्ञायां नाहं स्वर्गमवाप्नुयाम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब तक मैं धृष्टद्युम्न को न मार डालूँ, तब तक मैं अपना कवच नहीं उतारूँगा।’ यदि मेरी यह प्रतिज्ञा झूठी सिद्ध हुई, तो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति न हो॥9॥
 
I will not remove my armour until I have killed Dhrishtadyumna.' If this vow of mine proves false, then I may not attain heaven.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)