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श्लोक 8.57.1  |
संजय उवाच
दुर्योधनस्तत: कर्णमुपेत्य भरतर्षभ।
अब्रवीन्मद्रराजं च तथैवान्यांश्च पार्थिवान्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं- भरतश्रेष्ठ! तदनन्तर दुर्योधन कर्ण के पास गया और मद्रराज शल्य तथा अन्य राजाओं से बोला- 1॥ |
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| Sanjay says- Bharatshrestha! Thereafter Duryodhana went to Karna and said to Madraraja Shalya and other kings - 1॥ |
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