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mahabharat 8.56.95-96h: अर्जुन रथसेना और घुड़सवारों के साथ घुसकर पाश धारण किए हुए यमराज की भाँति कौरव सेना के मध्य में विचरण करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 95-96h
 
 
श्लोक  8.56.95-96h 
विगाह्य तु रथानीकमश्वसंघांश्च फाल्गुन:॥ ९५॥
व्यचरत् पृतनामध्ये पाशहस्त इवान्तक:।
 
 
अनुवाद
अर्जुन रथसेना और घुड़सवारों के साथ घुसकर पाश धारण किए हुए यमराज की भाँति कौरव सेना के मध्य में विचरण करने लगे।
 
Arjuna entered the chariot army and the horsemen and started roaming in the middle of the Kaurava army like Yamaraja holding a noose. 95 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)