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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 94-95h
 
 
श्लोक  8.56.94-95h 
क्रुद्धौ तौ तु नरव्याघ्रौ वेगवन्तौ बभूवतु:॥ ९४॥
तलशब्देन रुषितौ यथा नागौ महावने।
 
 
अनुवाद
जैसे विशाल वन में ताली की ध्वनि सुनकर क्रोधित हुए दो हाथी दौड़ते हुए आते हैं, उसी प्रकार वे दोनों सिंह पुरुष क्रोध में भरे हुए बड़े वेग से आगे बढ़ रहे थे।
 
Just as two elephants, enraged by the sound of clapping, come running in a vast forest, similarly those two lion-men, filled with rage, were coming forward with great speed. 94 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)