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mahabharat 8.56.92-93h: उस विशाल सेना को भेदकर श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनों ही उसके भीतर प्रविष्ट हो गए और अपनी महान् प्रतिभा से चमकने लगे। शत्रुओं के प्रति उनके हृदय क्रोध से भर गए और उनकी आँखें क्रोध से लाल हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 92-93h
 
 
श्लोक  8.56.92-93h 
तौ विदार्य महासेनां प्रविष्टौ केशवार्जुनौ॥ ९२॥
क्रुद्धौ संरम्भरक्ताक्षौ व्यभ्राजेतां महाद्युती।
 
 
अनुवाद
उस विशाल सेना को भेदकर श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनों ही उसके भीतर प्रविष्ट हो गए और अपनी महान् प्रतिभा से चमकने लगे। शत्रुओं के प्रति उनके हृदय क्रोध से भर गए और उनकी आँखें क्रोध से लाल हो गईं।
 
Having pierced through that huge army, both Shri Krishna and Arjun entered inside it and were shining with their great brilliance. Their hearts were filled with anger towards the enemies and their eyes were turning red with rage. 92 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)