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mahabharat 8.56.88-89h: अर्जुन की बातें सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए उससे कहा, 'हे पाण्डुपुत्र! तुम शीघ्र ही कौरव सैनिकों का संहार करो।'   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 88-89h
 
 
श्लोक  8.56.88-89h 
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य गोविन्द: प्रहसन्निव॥ ८८॥
अब्रवीदर्जुनं तूर्णं कौरवाञ्जहि पाण्डव।
 
 
अनुवाद
अर्जुन की बातें सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए उससे कहा, 'हे पाण्डुपुत्र! तुम शीघ्र ही कौरव सैनिकों का संहार करो।'
 
Hearing Arjun's words, Lord Krishna smilingly said to him, 'O son of Pandu! You quickly kill the Kaurava soldiers.' 88 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)