Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.56.83-84h: जनार्दन! यह संशप्तक सेना युद्ध करते-करते लड़खड़ा गई है। ये संशप्तक योद्धा अपने-अपने समूहों के साथ भाग रहे हैं। जैसे सिंह की दहाड़ सुनकर हिरण विचलित हो जाते हैं, उसी प्रकार ये लोग मेरे बाणों की मार सहन करने में असमर्थ हो गए हैं।' | mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनार्दन! यह संशप्तक सेना युद्ध करते-करते लड़खड़ा गई है। ये संशप्तक योद्धा अपने-अपने समूहों के साथ भाग रहे हैं। जैसे सिंह की दहाड़ सुनकर हिरण विचलित हो जाते हैं, उसी प्रकार ये लोग मेरे बाणों की मार सहन करने में असमर्थ हो गए हैं।'
‘Janardan! This Sanshaptaka army has lost its footing while fighting. These Sanshaptaka warriors are running away with their respective groups. Just as deer get discouraged on hearing the roar of a lion, similarly these people have become incapable of bearing the blows of my arrows. 83 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥