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mahabharat 8.56.80-81h: सूतपुत्र कर्ण युद्धभूमि में पाण्डव सेना को क्रोधपूर्वक भगाते हुए अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे और भीमसेन भी कौरव सेना को भगाते हुए अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 80-81h
 
 
श्लोक  8.56.80-81h 
सूतपुत्रो रणे क्रुद्ध: पाण्डवानामनीकिनीम्॥ ८०॥
भीमसेन: कुरूंश्चापि द्रावयन्तौ विरेजतु:।
 
 
अनुवाद
सूतपुत्र कर्ण युद्धभूमि में पाण्डव सेना को क्रोधपूर्वक भगाते हुए अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे और भीमसेन भी कौरव सेना को भगाते हुए अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे।
 
Suta's son Karna was looking very handsome in the battlefield while chasing away the Pandava army in anger and Bhimasena was looking very handsome while chasing away the Kaurava army. 80 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)