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mahabharat 8.56.79-80h: हे भरतश्रेष्ठ! वह सेना परस्पर युद्ध करती हुई रक्त की धारा में डूब गई और एक दूसरे की चोट खाकर नष्ट हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 79-80h
 
 
श्लोक  8.56.79-80h 
तद् बलं भरतश्रेष्ठ वध्यमानं परस्परम्।
रुधिरौघपरिक्लिन्नं रुधिरार्द्रं बभूव ह॥ ७९॥
जगाम भरतश्रेष्ठ वध्यमानं परस्परम्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वह सेना परस्पर युद्ध करती हुई रक्त की धारा में डूब गई और एक दूसरे की चोट खाकर नष्ट हो रही थी।
 
O best of the Bharatas! That army fighting each other was drowned in the flow of blood and was getting destroyed by getting hit by each other. 79 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)