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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  8.56.78 
मन्युवीर्यबलोपेतं दर्पात् प्रत्यवरोपितम्।
अभवत् तव पुत्रस्य तत् सैन्यं निष्प्रभं तदा॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि आपके सैनिकों में क्रोध, वीरता और बल की कमी नहीं थी, तथापि उनका अभिमान चूर-चूर हो गया था; इसलिए उस समय आपके पुत्र की समस्त सेना शक्तिहीन प्रतीत हो रही थी।
 
Although your soldiers were not lacking in anger, valour and strength, yet their pride was shattered; therefore at that time your son's entire army appeared to be devoid of energy. 78
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)