Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.56.77: हे मनुष्यों के स्वामी! जैसे ज्वार-भाटा न आने पर समुद्र शांत और निर्मल हो जाता है, वैसे ही आपकी सारी सेना स्थिर खड़ी थी।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  8.56.77 
प्रसन्नसलिले काले यथा स्यात् सागरो नृप।
तद्वत् तव बलं तद् वै निश्चलं समवस्थितम्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जैसे ज्वार-भाटा न आने पर समुद्र शांत और निर्मल हो जाता है, वैसे ही आपकी सारी सेना स्थिर खड़ी थी।
 
O Lord of men! Just as the sea appears still when the water is clear and calm due to no high tide, your entire army was standing still.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)