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mahabharat 8.56.73-74h: हजारों रथी अपने रथों से गिर पड़े थे। उनके हथियार भी गिर पड़े थे। वे सभी घायल हो गए थे और भीमसेन के भय से भयभीत और निर्जीव से प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  8.56.73-74h 
सहस्रशश्च रथिन: पातिता: पतितायुधा:॥ ७३॥
ते क्षता: समदृश्यन्त भीतभीता गतासव:।
 
 
अनुवाद
हजारों रथी अपने रथों से गिर पड़े थे। उनके हथियार भी गिर पड़े थे। वे सभी घायल हो गए थे और भीमसेन के भय से भयभीत और निर्जीव से प्रतीत हो रहे थे।
 
Thousands of charioteers were thrown down from their chariots. Their weapons had also fallen. All of them were wounded and looked terrified and lifeless due to the fear of Bhimasena. 73 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)