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mahabharat 8.56.71-72h: वहाँ भीमसेन के बाणों से घायल होकर हाथी अपने सवारों सहित गिर पड़े और पृथ्वी काँपने लगी।   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 71-72h
 
 
श्लोक  8.56.71-72h 
तत्र मर्मसु भीमेन नाराचैस्ताडिता गजा:॥ ७१॥
प्रपतन्तो हतारोहा: कम्पयन्ति स्म मेदिनीम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ भीमसेन के बाणों से घायल होकर हाथी अपने सवारों सहित गिर पड़े और पृथ्वी काँपने लगी।
 
There the elephants, wounded in vital spots by Bhimasena's arrows, fell down along with their riders and caused the earth to tremble. 71 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)