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mahabharat 8.56.64: आर्य! द्रौपदी के पुत्र धृष्टद्युम्न और सैकड़ों अन्य लोग शत्रुओं के संहारक राधा के पुत्र कर्ण को घेरकर खड़े थे। 64॥   |   mahabharat अध्याय 8.56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 56: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके साथ घोर युद्ध करके पराजित होना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  8.56.64 
धृष्टद्युम्नश्च राधेयं द्रौपदेयाश्च मारिष।
परिवव्रुरमित्रघ्नं शतशश्चापरे जना:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
आर्य! द्रौपदी के पुत्र धृष्टद्युम्न और सैकड़ों अन्य लोग शत्रुओं के संहारक राधा के पुत्र कर्ण को घेरकर खड़े थे। 64॥
 
Arya! Dhrishtadyumna, Draupadi's son and hundreds of other people stood surrounding Karna, the son of Radha, the destroyer of enemies. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)